सूर्य मंत्र का जाप बहुत ही आसान है. इसका जाप करने का सबसे सही समय सूर्योदय है. इन मंत्रों को अलग-अलग 12 मुद्राओं के साथ जपा जा सकता है.
ऊं मित्राय नम:
ऊं रवये नम:
ऊं सूर्याय नम:
ऊं भानवे नम:
ऊं पुष्णे नम:
ऊं मारिचाये नम:
ऊं आदित्याय नम:
ऊं भाष्कराय नम:
ऊं आर्काय नम:
ऊं खगये नम:
कई व्रत-त्योहार भगवान सूर्य को समर्पित हैं. मकर संक्रान्ति, रथ सप्तमी, छठ और संबा दशमी में भगवान सूर्य की उपासना की जाती है.
सूर्य मंत्र के लाभ
भगवान सूर्य को आत्मा का हिस्सा माना जाता है. सूर्य मंत्र का जाप करते समय अर्घ्य देना और भी शुभ फलदायी होता है. इससे स्वास्थ्य लाभ भी होता है.
नियमित तौर पर सूर्य मंत्र का जाप करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है..
मंत्रजाप करते समय सूर्य भगवान को 7 बार अर्घ्य देना चाहिए. अगर आप और ज्यादा शुभ फल की प्राप्ति चाहते हैं तो आपको लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए.
ऋग्वेद क्या कहता है-
ऋग्वेद के मुताबिक, सूर्योदय के वक्त उठेन वाले व्यक्ति के सभी कार्य पूरे होते हैं. ब्रह्मांड के सभी जीव और चीजें सूर्य पर आश्रित हैं. सूर्य सभी के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकार दूर करता है.
सूर्य के 7 रंगों का खास महत्व है. सूर्य मंत्र का जाप करने से इन रंगों की ऊर्जा प्राप्त करने में मदद मिलती है. सूर्य मंत्र के जाप से बुद्धि बढ़ाने में भी मदद मिलती है.
अर्घ्य कैसे दें-
तांबे के बर्तन में जल भरें, इसमें लाल चंदन, कुमकुम और लाल रंग का फूल डालें. सूर्योदय के समय पूर्व की दिशा में मुंह करके अर्घ्य दें. अगर आप सूर्य को अर्घ्य देते समय किसी पौधे की जड़ पर जल चढ़ाते हैं तो और बेहतर होगा.
अपने सिर की ऊंचाई के बराबर तांबे के पात्र को ले जाकर सूर्य मंत्र का जाप करें.
जल चढ़ाते समय ये मंत्र बोलने से मिलता है मान-सम्मान
मान्यताओं के अनुसार सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। अगर आप जीवन में सफलता के साथ ही प्रसिद्धि और धन लाभ पाना चाहते हैं तो बिना सूर्य देव की कृपा के ये संभव नहीं है। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए जल चढ़ाते समय यहां बताए जा रहे सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए।
🌼 सूर्य अर्घ्य मंत्र🌼
सूर्य को ये मंत्र बोलकर जल चढ़ाएं...
ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:।
अर्घ्य समर्पयामि।।


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