रविपुष्प योग
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र हैं। इनमें 8वें स्थान पर पुष्य नक्षत्र आता है, जो बेहद ही शुभ एवं कल्याणकारी नक्षत्र है, इसलिए इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है।
जब यह नक्षत्र रविवार के दिन होता है तो इस नक्षत्र एवं वार के संयोग से रवि पुष्य योग बनता है। इस योग में ग्रहों की सभी बुरी दशाएँ अनुकूल हो जाती हैं, जिसका परिणाम सदैव आपके लिए शुभकारी होता है। रवि पुष्य योग को रवि पुष्य नक्षत्र योग भी कहा जाता है।
रवि पुष्य योग में करे ये कार्य जो आपके लिए होंगे शुभ फलदायी
रवि पुष्य योग समस्त शुभ और मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के लिए उत्तम माना गया है। यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो अथवा कोई अच्छा मुहूर्त नहीं भी हो, ऐसी स्थिति में भी रवि पुष्य योग सभी कार्यों के लिए परम लाभकारी होता है लेकिन विवाह को छोड़कर। इस योग में सोने के आभूषण, प्रॉपर्टी और वाहन आदि की खरीददारी करना लाभदायक होता है। रवि पुष्य योग में नए व्यापार और व्यवसाय की शुरुआत करना भी श्रेष्ठ बताया जाता है। इसके अलावा यह योग तंत्र-मंत्र की सिद्धि एवं जड़ी-बूटी ग्रहण करने में विशेष रूप से उपयोगी होता है।
ज्योतिषाचार्य पं आनन्द शर्मा ने बताया कि पुष्प योग बहुत प्रभावशाली होता इस दिन साधना करने से कार्य की गुणवत्ता एवं उसके प्रभाव में वृद्धि होती है।
धन वैभव में वृद्धि होती है।
यंत्र सिद्धि के लिए यह शुभ दिन होता है।
जन्मकुंडली में स्थित सूर्य के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।
सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन सुर्ख लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है।
जीवन में आर्थिक समृद्धि आती है।
रवि पुष्य योग करे ये कार्य व उपाय
सूर्यदेव देगे सदा आपका साथ
रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलाने से आर्थिक लाभ होता व भौतिक सुख की प्राप्ति होती है।
रविवार के दिन घर के मंदिर में दीपक जलाने से कार्य में आने वाली बाधा समाप्त होती है।
तांबे के लोटे में जल में दूध, लाल पुष्प और लाल चंदन डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से शत्रु कमजोर होते हैं सूर्यदेव सुख सम्रद्धि प्रदान करते हैं।

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