एकादशी पर गोपाल स्तुति करने का फल

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

  मार्गशीर्ष , अहगन माह के कृष्णपक्ष की एकादशी को उतपन्ना  एकादशी कहा जाता है ।पौराणिक कथाओं के अनुसार  प्रभु श्री हरि विष्णु जब निद्रा में थे तब एक  दैत्य से उनकी रक्षा के लिए उनके तेज से एक देवी उत्पन्न हुई थी  वह एकादशी का दिन था उन्होंने उस दैत्य का वध करके प्रभु श्री हरि विष्णु रक्षा की इस लिए प्रभु श्रीनारायण ने  देवी को उतपन्ना एकादशी कहा ।   ज्योतिषाचार्य पं आनन्द शर्मा  ने उतपन्ना एकादशी व्रत को बहुत फलदायी  बताया है  जो मनुष्य  इस एकादशी का व्रत  विध विधान पूर्वक शुद्ध मन से करता है  । उसका  सभी संकटो से स्वयं प्रभु  श्री  नारायण रक्षा करते है । जो इस व्रत को करता है उस मनुष्य को जीवन में किसी भी प्रकार का भय व अकाल मृत्यु नही होती है  उसे हजारों अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है

उतपन्ना एकादशी को संकल्प ले कर 1 वर्ष तक  हर एकादशी को  श्री गोपाल स्तुति  का 11 बार पाठ करने से श्री विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है  उसे यश कीर्ति  प्राप्त होती । उसकी अकालमृत्यु नहीं होती उसे किसी भी प्रकार भय नही होता । संतानसुख प्राप्त होता है व  महालक्ष्मी का आशीर्वाद सदा उस पर बना रहता है ।



ध्यान:

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥



                 
                   गोपाल स्तुति


नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः॥

नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः॥

नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।
नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥

बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।

रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥

कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥

वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नमः।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥

बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नमः प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नमः॥

नमः पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥

निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नमः॥

प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥

श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥

केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥

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