रविप्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है करें श्वेत आक पुष्पों से विशेष पूजा आपके सर्वमनोरथ पूर्ण करेंगे महादेव
ॐ नमः शिवाय
शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है.रवि प्रदोष का व्रत करके जीवन के समस्त रोग दोष शोक कलह क्लेश हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं. इस व्रत को करने से हृदय रोग, आखों के रोग विकार, सरकारी विभाग की अड़चने, पारिवारिक स्वास्थ्य, दाम्पत्य जीवन के कलह आदि को बहुत आसानी से दूर किया जा सकता है
इस व्रत को करके व्यक्ति लंबा और निरोगी जीवन प्राप्त कर सकता है. यह व्रत रोग और जीवन के सारे दुख, संकट दूर करके व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है. हर महीने शुक्लपक्ष व कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है.
पूजा का शुभ मुहुर्त-
रवि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 बजे से शाम 7.00 बजे के बीच की जाना चाहिए.
पूजन सामग्री-
एक जल से भरा हुआ कलश
एक थाली आरती के लिए
बेलपत्र
धतूरा
भांग
कपूर
सफेद पुष्प
श्वेत आंकड़े का पुष्प
सफेद मिठाई
सफेद चंदन
धूप
दीप
गाय का घी
सफेद वस्त्र
प्रदोष व्रत प्रत्येक त्रयोदशी को किया जाता है, परंतु विशेष कामना के लिए वार संयोगयुक्त प्रदोष का भी बड़ा महत्व है.
ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा ने बताया जो व्यक्ति रोग से पीड़ित हो गृह में क्लेश हो , मानसिक तनाव में हो । या किसी आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा हो । उस व्यक्ति को अवश्य ही रवि प्रदोष का व्रत करना चाहिये । यदि सामर्थ्य हो तो रवि प्रदोष को रुद्राभिषेक अवश्य करवाना चाहिए । जिसके प्रसाद फल से उसकी सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।
रविप्रदोष पर श्वेत आक के पुष्पों द्वारा विशेष शिव पूजन ....
सुबह नित्य कर्म से निवर्त होकर शुद्ध मन से गुरुदेव प्रभु का ध्यान करे । श्री सूर्य देव को जल अर्पित करें उसमे श्वेत आक पुष्प , अखण्ड चावल , सफेद चंदन डाले व धूप दीप करे सूर्यदेव की स्तुति करें।
शिव मन्दिर में जाये महादेव का पूजन करे श्वेतआक के 108 पुष्प मंत्र सहित महादेव को अर्पित करें । आप 108 बार ,ॐ नमः शिवाय , मन्त्र के जप के साथ पुष्प अर्पण कर महादेव से सर्वकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करे।
आप इन मंत्रों से भी पुष्प अर्पित कर सकते है
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इस मंत्र के साथ यदि महादेव को श्वेत आक पुष्प अर्पित किए जाए तो मनुष्य सभी तरह की पीड़ाओं । रोग , संकट, क्लेश , तन्त्र , टोने टोटको व ग्रहो के दोष ,भय पीड़ाओं से मुक्ति मिलती हैं
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि तन्नोरुद्र: प्रचोदयात्।
शिव गायत्री मंत्र के साथ महादेव का पूजन करने से शनि की साढ़े साती , राहु केतु अन्य ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है । महादेव के आशीर्वाद से व्यक्ति की यश ,प्रसिद्धि ,सम्मान , धन सम्पदा ,कीर्ति चारो दिशाओं में फैलती है

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