भौम अमावस्या पर करे मंगलग्रह व श्री हनुमान जी की विशेष पूजा
मंगलवार और अमावस्या के भौम अमावस्या योग में हनुमानजी की पूजा विधि-विधान से करें। जयपुर के ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा के अनुसार । पूजा में हनुमानजी के सामने सरसों के तेल के 5 दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा के 7 पाठ करें। तन्त्र , भय , संकटो से रक्षा के लिए हनुमानाष्टक के 11 पाठ करे । भक्त यदि किसी प्रकार के रोग से पीड़ित हैं तो हनुमानबाहुक का पाठ करे । संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ करे जो सर्व प्रकार के मनोरथ पूर्ण करने वाला होता है ।
सुबह व शाम स्नान के बाद पवित्र भावों के साथ श्री हनुमान की सिंदूर प्रतिमा पर सिंदूर व चमेली के तेल से चोला चढ़ाएं।
श्री हनुमान को लाल चंदन, लाल फूल, जनेऊ व श्रीफल यानी नारियल चढ़ाएं। गुड़-चने या गुड़ के पकवानों का भोग लगाएं।
धूप व दीप जलाकर लाल आसन पर श्री हनुमान की प्रतिमा की ओर मुख कर बैठें व चंदन की माला से नीचे लिखे हनुमान गायत्री मंत्र का स्मरण, सुख-ऐश्वर्य व अनिष्ट शांति की कामना से कम से कम 108 बार करें -
ॐ अंजनीसुताय विद्महे,
वायुपुत्राय धीमहि,
तन्नो मारुति: प्रचोदयात्।।
श्री हनुमान जी की धूप, दीप, आरती करें। सिंदूर मस्तक पर लगाए व प्रसाद ग्रहण करें।
भूमिपुत्र देव , मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करे।
यदि किसी जातक को मंगल ग्रह का कुंडली दोष है या किसकी का मंगल शुभ नहीं है तो उसे इस विशेष योग पर मंगल की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
मंगल की पूजा के लिए शिव मंदिर में शिवलिंग की पूजा करे इसीलिए इस दिन शिवलिंग पर लाल फूल, लाल गुलाल चढ़ाएं। मसूर की दाल अर्पित करें , लाल फल , लाल ही मिष्ठान्न का भोग लगाएं व महादेव से सुख शांति की प्रार्थना करे।
मंत्र का जाप करे ।
"ॐ अं अंगारकाय नमः".
इस मन्त्र का 108 बार लाल चंदन से बनी माला से जाप करे । ऐसा करने से मंगल ग्रह से सम्बंधित दोष का निवारण होता है
मंगलवार और अमावस्या के भौम अमावस्या योग में हनुमानजी की पूजा विधि-विधान से करें। जयपुर के ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा के अनुसार । पूजा में हनुमानजी के सामने सरसों के तेल के 5 दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा के 7 पाठ करें। तन्त्र , भय , संकटो से रक्षा के लिए हनुमानाष्टक के 11 पाठ करे । भक्त यदि किसी प्रकार के रोग से पीड़ित हैं तो हनुमानबाहुक का पाठ करे । संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ करे जो सर्व प्रकार के मनोरथ पूर्ण करने वाला होता है ।
सुबह व शाम स्नान के बाद पवित्र भावों के साथ श्री हनुमान की सिंदूर प्रतिमा पर सिंदूर व चमेली के तेल से चोला चढ़ाएं।
श्री हनुमान को लाल चंदन, लाल फूल, जनेऊ व श्रीफल यानी नारियल चढ़ाएं। गुड़-चने या गुड़ के पकवानों का भोग लगाएं।
धूप व दीप जलाकर लाल आसन पर श्री हनुमान की प्रतिमा की ओर मुख कर बैठें व चंदन की माला से नीचे लिखे हनुमान गायत्री मंत्र का स्मरण, सुख-ऐश्वर्य व अनिष्ट शांति की कामना से कम से कम 108 बार करें -
ॐ अंजनीसुताय विद्महे,
वायुपुत्राय धीमहि,
तन्नो मारुति: प्रचोदयात्।।
श्री हनुमान जी की धूप, दीप, आरती करें। सिंदूर मस्तक पर लगाए व प्रसाद ग्रहण करें।
भूमिपुत्र देव , मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करे।
यदि किसी जातक को मंगल ग्रह का कुंडली दोष है या किसकी का मंगल शुभ नहीं है तो उसे इस विशेष योग पर मंगल की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
मंगल की पूजा के लिए शिव मंदिर में शिवलिंग की पूजा करे इसीलिए इस दिन शिवलिंग पर लाल फूल, लाल गुलाल चढ़ाएं। मसूर की दाल अर्पित करें , लाल फल , लाल ही मिष्ठान्न का भोग लगाएं व महादेव से सुख शांति की प्रार्थना करे।
मंत्र का जाप करे ।
"ॐ अं अंगारकाय नमः".
इस मन्त्र का 108 बार लाल चंदन से बनी माला से जाप करे । ऐसा करने से मंगल ग्रह से सम्बंधित दोष का निवारण होता है

जय श्री राम
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