पुराणों में बताए गए हैं 8 भैरव
स्कंद पुराण के अवंति खंड के वर्णित भगवान भैरव के 8 रूप माने गए हैं। इनमें से कालभैरव तीसरा रूप है। शिव पुराण के अनुसार माना जाता है कि शाम के समय जब रात्रि अगमन और दिन खत्म होता है तब प्रदोष काल में शिव के रौद्र रूप से भैरव प्रकट हुए थे। भैरव से ही अन्य 7 भैरव और प्रकट हुए जिन्हें अपने कर्म और रूप के अनुसार नाम दिए गए हैं।
रुरुभैरव
संहारभैरव
कालभैरव
असितभैरव
क्रोधभैरव
भीषणभैरव
महाभैरव
खटवांगभैरव
काल भैरव
भैरव का अर्थ है भय को हरने वाला या भय को जीतने वाला। इसलिए कालभैरव रूप की पूजा करने से मृत्यु और हर तरह के संकट का भय दूर हो जाता है। नारद पुराण में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
ज्योतिषाचार्य पं आनन्द शर्मा अनुसार कलियुग में रुद्र के अवतार हनुमान जी व भैरव जी का विधि पूर्वक पूजन करने से वो मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण करते है कालभैरव के पूजन में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए सही विधि विधान से पूजन करना चाहिए या की विद्वान ब्राह्मण से करवानी चाहिए ऐसा करने से
मनुष्य किसी रोग से लम्बे समय से पीड़ित है तो वह रोग, तकलीफ और दुख भी दूर होती हैं। उसके सभी भय का नाश होता है किसी भी प्रकार के तंत्र मंत्र टोटको का असर समाप्त होता है व स्वंय बाबा कालभैरव उसकी रक्षा करते है
कालभैरव की पूजा पूरे देश में अलग-अलग नाम से और अलग तरह से की जाती है। कालभैरव भगवान शिव की प्रमुख गणों में एक हैं।।
दीपदान कैसे करे ।
दीपक संध्या काल मे ही प्रज्वलित करें व भैरव भी पूजन भी प्रदोष काल मे ही करें
सर्वप्रथम आप कितने दीपक प्रज्वलित करना चाहते है भगवान कालभैरव के प्रति वो आपकी श्रद्धा पर निर्भर होता है जैसे कोई 11, 21, 51, 108 सभी आपकी इच्छा से है आप जितने भी दीप प्रज्वलित करें उनमे 3 दीपक अधिक प्रज्वलित करें उनमे 1 गणेश जी के लिए 1 गुरु देव के लिए व 1 शिवपार्वती के लिए
क्योकि दीपक ही हमारे द्वारा किये गए शुभ पूण्य कर्म के साक्षी बनते है


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