शुभ योग पर करे रूद्रावतार हनुमान जी व रूद्रावतार कालभैरव का पूजन

 


श्री रूद्रावतार हनुमान जी के वार मंगलवार को बना है  श्री रूद्रावतार कालभैरव अष्टमी का  शुभ योग  बना है


   जयपुर के ज्योतिषाचार्य पं आनन्द शर्मा के अनुसार  दोनों ही देवता श्री हनुमान जी व श्री कालभैरव  भगवान शिव  का ही अवतार है। इसलिए मंगलवार को विशेष पूजन के द्वारा   श्री हनुमानजी व श्री कालभैरव  को प्रशन्न किया जा सकता है ।
 कैसे करे पूजा आइये जानते ...

 सर्वप्रथम सुबह स्नान के पश्चात हनुमान जी के मंदिर में जाये यदि आपके पास दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर हो तो वहां हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाये  लाल पुष्प अर्पित करें आज विशेष योग पर गुड़ भुने हुए चने का भोग लगाएं श्री हनुमान चालीसा या सुंदरकांड , हनुमानबाहुक का पाठ करे  व  ,ॐ हरि मर्कट मर्कटाय , या   ॐ हं हनुमते नमः मन्त्र का कम से कम 108 बार अवश्य जप करे ।


प्रभु श्री हनुमान जी से कामना सिद्धि की प्रार्थना करे  । प्रभु आप के सब मनोरथ पूर्ण करेंगे   कृपया अधार्मिक कार्यो से दूर रहे जो आपके लिए मंगलकारी होगा ।

 मंगलवार को काल भैरव अष्टमी भी है।

 पौराणिक कथाओं के अनुसार मार्गशीर्ष मास  के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था।
 इस तिथि पर काल भैरव की विशेष पूजा की जाती है। और इसे कालभैरव अष्टमी भी कहते है ।
ज्योतिषाचार्य पं. आनन्द जी  शर्मा के अनुसार जानिए कुछ  बातें जो कालभैरव अष्टमी  विशेष रूप से ध्यान रखने योग्य हैं । 

 काल भैरव की पूजा  में सावधान होकर सही विधान से पूजा करनी चाहिए । या किसी विद्वान के सानिध्य में पूजा करनी शुभ फलदायी होती है

काल भैरव अवतार संध्याकाल में हुआ था। इसीलिए भैरव पूजा शाम और रात के समय करना ज्यादा शुभ माना गया है। काल भैरव अष्टमी पर स्नान के बाद   भैरव मंदिर जाएं। सिंदूर, सुगंधित तेल से भैरव भगवान का श्रृंगार करें।  लाल पुष्प अर्पित करें चावल चढ़ाये ,जनेऊ चढ़ाये  व नारियल अर्पित करे  गुड़ चने या गुड़ तिल का भोग लगाएं  । इतर लगाए  धूप बत्ती  और सरसों के तेल या तिल के तेल  का दीपक जलाएं।
इस दिन आप भैरव  मंत्र का जाप  भी शुभ मंगलकारी होता है
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं'।

श्री कालभैरवाय नमः

 ॐ भैरवाय नमः

मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें,

जप करते समय रुद्राक्ष की माला का उपयोग सर्वश्रेष्ठ होता है क्योंकि भैरव  शिव का ही अवतार है

कालभैरव  पूजा में विशेष ध्यान रखने योग्य बात है  कि शिव पार्वति की भी पूजा अवश्य करे 

इसके बाद भैरव भगवान के सामने धूप, दीप और कर्पूर जलाएं, आरती करें, प्रसाद ग्रहण करें। भैरव भगवान के वाहन कुत्तों को प्रसाद और रोटी खिलाएं।

इस विधान से पूजा करने से आपको अगर कोई ग्रह पीड़ा होतो वह भी शांत होती है । शनि की दशा या  राहु -केतु के  ग्रह दोष का भी निवारण  होता है

जय बाबा काल भैरव सब संकटो से रक्षा करना प्रभु

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