पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महानंदा नवमी की व्रत करने से सभी प्रकार के रोग और कष्ट व दरिद्रता से छुटकारा मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। आइये जानते व्रत कथा व उसका महत्व
श्रीमहानंदा नवमी व्रत का महत्व
जयपुर के ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा में बताया है जो व्यक्ति दरिद्रता , रोग ,ग्रह क्लेश , व मानसिक रूप से अशांत हो उसे इस व्रत को सही विधि विधान से करना चाहिए ताकि उसे महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त हो । याद रखने योग्य बात है कि मन्त्र जाप व पूजा सही महुर्त लग्न व शुभ ग्रह नक्षत्र में ही सर्वश्रेष्ठ होता है।
श्रीमहानंदा नवमी के दिन पूजाघर में दीपक जलाएं और माता महालक्ष्मी का विशेष पूजन करें श्री गणपति जी महाराज के साथ व इस शुभ योग में श्री महालक्ष्मी जी के इस मंत्र का जाप करे लाल चंदन से बनी माला से 1100 मंत्रो का जप करना बहुत शुभ फलदायी होता है । मन्त्र इस प्रकार है ..
महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
व श्री गणपति वंदना व मन्त्र जाप अवश्य करे
ॐ गं गणपतये नमः
महानंदा नवमी पर करें पूजा
महानंदा व्रत के दिन पूजा करने का खास विधान है। श्री महानंदा नवमी व्रत से कुछ दिन पहले घर की साफ-सफाई करें। जैसे कि हम दीपावली पर करते है नवमी के दिन पूजाघर में एक दीपक प्रज्वलित करें उसमे गाय के घृत का उपयोग करे और । रात्रि जागरण कर
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
मंत्र का जाप करते रहें। जाप के बाद रात में पूजा कर पारण करना चाहिए। साथ ही नवमी के दिन कुंवारी कन्याओं को भोजन करा कुछ दान दें फिर उनसे आर्शीवाद मांगें। आर्शीवाद आपके लिए बहुत शुभ होगा।
इस व्रत से जीवन में आएगा बदलाव
ऐसा माना जाता है कि महानंदा नवमी के दिन व्रत तथा पूजा करने से घर की दरिद्रता का नाश होता है रोग व कष्ट दूर होते है । सभी दुख और क्लेश दूर हो जाते हैं। इस व्रत के मनुष्य को न केवल भौतिक सुख मिलते हैं बल्कि मानसिक शातिं भी मिलती है। आपके मन मे कहि असन्तोष है कि आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि नही है तो आप अवश्य महानंदा नवमी का व्रत जरूर करें। इस व्रत को करने और मन से लक्ष्मी का ध्यान कर पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभदायी व शुभकारी होता है।
श्री महानंदा नवमी की पौराणिक कथा
एक बार एक साहूकार अपनी बेटी के साथ रहता था। बेटी बहुत धार्मिक प्रवृति की थी वह प्रतिदिन एक पीपल के वृक्ष की पूजा करती थी। उस पीपल के वृक्ष में लक्ष्मी जी का वास करती थीं। एक दिन लक्ष्मी जी साहूकार की बेटी से दोस्ती कर ली। लक्ष्मी जी एक दिन साहूकार की बेटी को अपने घर ले गयीं और उसे खूब खिलाया-पिलाया। उसके बाद बहुत से उपहार देकर बेटी को विदा कर दिया। साहूकार की बेटी को विदा करते समय लक्ष्मी जी बोली कि मुझे कब अपने घर बुला रही हो इस पर साहूकार की बेटी उदास हो गयी। उदासी से उसने लक्ष्मीजी को अपने घर आने का न्यौता दे दिया।
घर आकर उसने अपने पिता को यह बात बतायी और कहा कि लक्ष्मी जी का सत्कार हम कैसे करेंगे। इस पर साहूकार ने कहा हमारे पास जो भी है उसी से लक्ष्मी जी का स्वागत करेंगे। तभी एक चील उनके घर में हीरों का हार गिरा कर चली गयी जिसे बेचकर साहूकार की बेटी ने लक्ष्मी जी के लिए सोने की चौकी, सोने की थाली और दुशाला खरीदी। लक्ष्मीजी थोड़ी देर बाद गणेश जी के साथ पधारीं। उस कन्या ने लक्ष्मी-गणेश की खूब सेवा की। उन्होंने उस बालिका की सेवा से प्रसन्न होकर समृद्ध होने का आर्शीवाद दिया।
श्री महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
श्रीमहानंदा नवमी व्रत का महत्व
जयपुर के ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा में बताया है जो व्यक्ति दरिद्रता , रोग ,ग्रह क्लेश , व मानसिक रूप से अशांत हो उसे इस व्रत को सही विधि विधान से करना चाहिए ताकि उसे महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त हो । याद रखने योग्य बात है कि मन्त्र जाप व पूजा सही महुर्त लग्न व शुभ ग्रह नक्षत्र में ही सर्वश्रेष्ठ होता है।
श्रीमहानंदा नवमी के दिन पूजाघर में दीपक जलाएं और माता महालक्ष्मी का विशेष पूजन करें श्री गणपति जी महाराज के साथ व इस शुभ योग में श्री महालक्ष्मी जी के इस मंत्र का जाप करे लाल चंदन से बनी माला से 1100 मंत्रो का जप करना बहुत शुभ फलदायी होता है । मन्त्र इस प्रकार है ..
महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
व श्री गणपति वंदना व मन्त्र जाप अवश्य करे
ॐ गं गणपतये नमः
महानंदा नवमी पर करें पूजा
महानंदा व्रत के दिन पूजा करने का खास विधान है। श्री महानंदा नवमी व्रत से कुछ दिन पहले घर की साफ-सफाई करें। जैसे कि हम दीपावली पर करते है नवमी के दिन पूजाघर में एक दीपक प्रज्वलित करें उसमे गाय के घृत का उपयोग करे और । रात्रि जागरण कर
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
मंत्र का जाप करते रहें। जाप के बाद रात में पूजा कर पारण करना चाहिए। साथ ही नवमी के दिन कुंवारी कन्याओं को भोजन करा कुछ दान दें फिर उनसे आर्शीवाद मांगें। आर्शीवाद आपके लिए बहुत शुभ होगा।
इस व्रत से जीवन में आएगा बदलाव
ऐसा माना जाता है कि महानंदा नवमी के दिन व्रत तथा पूजा करने से घर की दरिद्रता का नाश होता है रोग व कष्ट दूर होते है । सभी दुख और क्लेश दूर हो जाते हैं। इस व्रत के मनुष्य को न केवल भौतिक सुख मिलते हैं बल्कि मानसिक शातिं भी मिलती है। आपके मन मे कहि असन्तोष है कि आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा दृष्टि नही है तो आप अवश्य महानंदा नवमी का व्रत जरूर करें। इस व्रत को करने और मन से लक्ष्मी का ध्यान कर पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभदायी व शुभकारी होता है।
श्री महानंदा नवमी की पौराणिक कथा
एक बार एक साहूकार अपनी बेटी के साथ रहता था। बेटी बहुत धार्मिक प्रवृति की थी वह प्रतिदिन एक पीपल के वृक्ष की पूजा करती थी। उस पीपल के वृक्ष में लक्ष्मी जी का वास करती थीं। एक दिन लक्ष्मी जी साहूकार की बेटी से दोस्ती कर ली। लक्ष्मी जी एक दिन साहूकार की बेटी को अपने घर ले गयीं और उसे खूब खिलाया-पिलाया। उसके बाद बहुत से उपहार देकर बेटी को विदा कर दिया। साहूकार की बेटी को विदा करते समय लक्ष्मी जी बोली कि मुझे कब अपने घर बुला रही हो इस पर साहूकार की बेटी उदास हो गयी। उदासी से उसने लक्ष्मीजी को अपने घर आने का न्यौता दे दिया।
घर आकर उसने अपने पिता को यह बात बतायी और कहा कि लक्ष्मी जी का सत्कार हम कैसे करेंगे। इस पर साहूकार ने कहा हमारे पास जो भी है उसी से लक्ष्मी जी का स्वागत करेंगे। तभी एक चील उनके घर में हीरों का हार गिरा कर चली गयी जिसे बेचकर साहूकार की बेटी ने लक्ष्मी जी के लिए सोने की चौकी, सोने की थाली और दुशाला खरीदी। लक्ष्मीजी थोड़ी देर बाद गणेश जी के साथ पधारीं। उस कन्या ने लक्ष्मी-गणेश की खूब सेवा की। उन्होंने उस बालिका की सेवा से प्रसन्न होकर समृद्ध होने का आर्शीवाद दिया।
श्री महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

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