सूर्य ग्रह का कुंडली मे कमजोर या नीच राशि में होने के दुष्प्रभाव व उपाय ..
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा, सरकारी कार्य, पिता, पुत्र, हड्डी, यश, तेज, सत्ता, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मा, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति, रोग प्रतिरोधकक्षमता, नेत्र ज्योति आदि का कारक मानागया है
जातक की कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में होना जहाँ व्यक्ति को जीवन में प्रसिद्धि और सफलता देता है । वह कोई राजकीय सम्मान प्राप्त करता है । यदि जातक स्वंय का व्यवसाय करता है तो उसके व्यवसाय में बहुत तरकी होती हैं।जातक का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।वह आत्मविश्वास से सदा भरा रहता है । पिता से उसके सम्बंध मधुर बने रहेंगें उनका सहयोग मिलेगा।
वही यदि सूर्य नीच में हो तो जीवन में बहुत सी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है । जातक का आपने पिता ,गुरु से सम्बंध ठीक नही रहते ।समाज मे भी मान सम्मान प्राप्त नही होता उसे हड्डियों व उदर , नेत्र से सम्बंधित विकार उत्पन्न हो जाता है ।राजपक्ष से भी भय रहता है व उसे हानि होती है।
आइये जानते है सूर्य का कुंडली में नीच या कमजोर होने के क्या दुष्प्रभाव होते है ...
सूर्य कमजोर या नीच होने के लक्षण
पिता व गुरु का साथ नहीं मिलता
राज्यपक्ष की ओर से दंड मिलता है
नौकरी चली जाती है.
घर मे चोरी हो जाती है.
घरमें यदि पालतू गाय या पशु हो तो वह खो जाती है या मर जाती है.
यदि आप में साहस की कमी हो तो सूर्य की स्थिति अशुभ हो सकती है
यदि आप मे तेज का अभाव है और आप हमेशा खुद को थका-थका महसूस करते हैं किसी काम को करने में आप आलस्य महसूस करते हैं
हृदय से सम्बंधित कोई विकार हो या कमजोरी का आभास होता है
सूर्य के अशुभ होने पर नेत्र ,उदर ,हृदय का रोग हो सकता है
अहंकार इतना अधिक होना कि स्वयं का नुकसान करते जाना,
पिता का सहयोग न मिलना व उनके घर से अलग होना,
राजकीय विवाद या न्यायालय कानूनी विवादों में फंसना और संपति विवाद होना,
अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से विवाद होना।
सूर्य को बलवान व अच्छे बनाने के उपाय ..
पिता व गुरु का सम्मान करें प्रतिदिन उनके चरण छुएं
प्रतिदिन या रविवार को श्रीआदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
प्रतिदिन श्री गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें
हर दिन सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन ,मीठा डालकर अर्घ्य देना
रविवार को उपवास रखना
तांबा, गेहूं एवं गुड़ का दान करें
भगवान विष्णु की उपासना करें
गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं
घर की पूर्व दिशा को वास्तुशास्त्र अनुसार सही करें
ॐ घृणि सूर्याय नमः मन्त्र का 108 बार ( 1 माला ) जाप करें
रविवार को श्री सूर्य गायत्री मन्त्र की 1 माला अवश्य जाप करे
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा, सरकारी कार्य, पिता, पुत्र, हड्डी, यश, तेज, सत्ता, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मा, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति, रोग प्रतिरोधकक्षमता, नेत्र ज्योति आदि का कारक मानागया है
जातक की कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में होना जहाँ व्यक्ति को जीवन में प्रसिद्धि और सफलता देता है । वह कोई राजकीय सम्मान प्राप्त करता है । यदि जातक स्वंय का व्यवसाय करता है तो उसके व्यवसाय में बहुत तरकी होती हैं।जातक का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।वह आत्मविश्वास से सदा भरा रहता है । पिता से उसके सम्बंध मधुर बने रहेंगें उनका सहयोग मिलेगा।
वही यदि सूर्य नीच में हो तो जीवन में बहुत सी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है । जातक का आपने पिता ,गुरु से सम्बंध ठीक नही रहते ।समाज मे भी मान सम्मान प्राप्त नही होता उसे हड्डियों व उदर , नेत्र से सम्बंधित विकार उत्पन्न हो जाता है ।राजपक्ष से भी भय रहता है व उसे हानि होती है।
आइये जानते है सूर्य का कुंडली में नीच या कमजोर होने के क्या दुष्प्रभाव होते है ...
सूर्य कमजोर या नीच होने के लक्षण
पिता व गुरु का साथ नहीं मिलता
राज्यपक्ष की ओर से दंड मिलता है
नौकरी चली जाती है.
घर मे चोरी हो जाती है.
घरमें यदि पालतू गाय या पशु हो तो वह खो जाती है या मर जाती है.
यदि आप में साहस की कमी हो तो सूर्य की स्थिति अशुभ हो सकती है
यदि आप मे तेज का अभाव है और आप हमेशा खुद को थका-थका महसूस करते हैं किसी काम को करने में आप आलस्य महसूस करते हैं
हृदय से सम्बंधित कोई विकार हो या कमजोरी का आभास होता है
सूर्य के अशुभ होने पर नेत्र ,उदर ,हृदय का रोग हो सकता है
अहंकार इतना अधिक होना कि स्वयं का नुकसान करते जाना,
पिता का सहयोग न मिलना व उनके घर से अलग होना,
राजकीय विवाद या न्यायालय कानूनी विवादों में फंसना और संपति विवाद होना,
अपने परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से विवाद होना।
सूर्य को बलवान व अच्छे बनाने के उपाय ..
पिता व गुरु का सम्मान करें प्रतिदिन उनके चरण छुएं
प्रतिदिन या रविवार को श्रीआदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
प्रतिदिन श्री गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें
हर दिन सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन ,मीठा डालकर अर्घ्य देना
रविवार को उपवास रखना
तांबा, गेहूं एवं गुड़ का दान करें
भगवान विष्णु की उपासना करें
गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं
घर की पूर्व दिशा को वास्तुशास्त्र अनुसार सही करें
ॐ घृणि सूर्याय नमः मन्त्र का 108 बार ( 1 माला ) जाप करें
रविवार को श्री सूर्य गायत्री मन्त्र की 1 माला अवश्य जाप करे
- घर मे सूर्य यंत्र को स्थापित करे जो भोजपत्र पर बना हो शुभ महुर्त व लग्न ग्रह नक्षत्र पर विधि विधान से पूजित व सिद्ध हो ।

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