मार्गशीर्ष पूर्णिमा को चन्द्र ग्रह का दोष निवारण के लिये विशेष पूजा विधान

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर करें चन्द्र ग्रह के दोष निवारण के लिए विशेष पूजा

मार्गशीर्ष माह पूर्णिमा के दिन श्री चंद्र देव की विशेष  पूजा का भी विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को हर तरह के सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन पूर्वजों को भी याद किया जाता है। इस दिन स्नान, दान और ध्यान विशेष फलदायी होता है। यदि कोई व्यक्ति पूरे विश्वास और श्रद्धा से इस व्रत को करता है तो वह इसी जन्म में मोक्ष प्राप्ति कर सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार  में अगहन माह पूर्णिमा  , मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व बताया जा हैं

        ज्योतिषाचार्य आनन्द शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणना  विज्ञान के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि बेहद महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा ठीक आमने-सामने होते हैं। इसी दिन चंद्रमा का प्रभाव मनुष्य पर सबसे अधिक होता है। शास्त्रों में चंद्रमा को मन का कारक बताया गया है।  मार्गशीर्ष पूर्णिमा को  चन्द्र ग्रह से सम्बंधित दोष किसी की कुंडली मे हो या किसी जातक का चन्द्र  शुभ नहीं है उसको विशेष रूप से  इस दिन चंद्र देव की शुभता के लिए उपाय करने चाहिए । इसलिए इस दिन व्यक्ति को चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।
आइये जानते चंद्र ग्रह के लिए मंत्र व पूजा विधान ...

सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होकर प्रभु श्री हरि विष्णु का ध्यान करे

सुबह श्वेत वस्त्र धारण करें ।

सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें उसमे श्वेत आक के पुष्प, चावल,लाल चन्दन , गुड़ तांबे के लोटे में मिलाकर श्री सूर्य देव को अर्पित करें ।

गाय के घृत से एक दीपक जलाएं  पूर्व दिशा की तरफ मुख करके कुशा आसन पर बैठे  गुरु व श्री गणेशजी का ध्यान करें।


श्वेत चन्दन से बनी माला का उपयोग ही करे
          माला व जाप के लिए मंत्र इस प्रकार है. .

 ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।

 ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।

* ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

इनमे से किसी भी मन्त्र की 11 माला के जाप अवश्य करे ।

सायंकाल को चन्द्रदेव को अर्घ्य अवश्य दे  मंत्र इस प्रकार है

चंद्रदेव अर्घ्य मंत्र –

ज्योत्‍सनापते नमस्तुभ्‍यं नमस्ते ज्योतिषामपतेः नमस्ते रोहिणिकांतं अर्ध्‍यं मे प्रतिग्रह्यताम
ॐ सोमाय नम:
ॐ रोहिणिकांताय नम:
ॐ चन्द्रमसे नम:
क्षीरोदार्णव सम्भूतम अत्रिनेत्र समुद्भव ग्रहाणार्ध्‍यं शशांकेमं रोहिण्यांसहितोमम्
ॐ सोमाय नम:...... ॐ रोहिणिकांताय नम:

 अर्घ्य अर्पित करते समय श्री चन्द्र देव से सुख शांति व कृपा दृष्टि आशीर्वाद की प्रार्थना करें

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