श्रीरामचरितमानस में श्री तुलसीदास जी बहूत ही सरल दोहों के माध्यम से जनकल्याण के लिए कई दोहों का वर्णन किया है जो ज्ञान विद्या प्राप्ति के लिए, कार्य मे सफलता के लिए , मनोकामना पूर्ण हेतु, समस्याओं से निजात के लिए , रोगों के नाश के नाश के लिए , सुख सम्रद्धि के लिए आदि में सहायक है।
👉सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारी के, कामद धन दारिद दवारि के।
👉धन संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए
विश्व भरण पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत अस होई।
👉मनोकामनाओं को पुर्ण करने के हेतु
जेहि के जेहि पर सत सनेहु, सो तेहि मिलहीं न कछु संदेहु।
👉ज्ञान विद्या प्राप्त करने के लिए
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब पाई।
👉कुटुंब-परिवार में प्रसिद्धि पाने के लिए
सब नर करहि परस्पर प्रीति, चलहि स्वधर्म निरख श्रुति नीति।
👉समस्याओं व परेशानियों को दूर करने के लिए
राजीव नयन धरे धनुषायक, भगत विपती भंजन सुखदायक।
👉कार्य मे सफलता पाने के लिए
कवन सो कठिन जग माहि, जो नही होत तात तुम पाही।
मानसिक तनाव दूर करने के लिए
हनुमान अंगद रन गाजे, हांक सुनत रजनीचर भाजे।

जय श्री राम
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